Sambodhi App Sambodhi App         +91-8742004849     books@jvbharati.org

Jain Vishva Bharati Online Book Store

Book Detail

Mahapragya Vaangmay-081 (Prakrtivihaar) (महाप्रज्ञ वांग्मय-081 (प्रकृतिविहार:))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 300
350 (Inclusive all of Taxes)
Qty:


Want Help to Place Order?
  Call Back
Out Of Stock


महाप्रज्ञसंस्कृत वांग्मय का यह प्रथम विभाग प्रकृतिविहार बहुविध रचनाओं का समाकलन ग्रंथ है। इस महाग्रंथ में कुल 319 विषयों का प्रतिपादन हुआ है और कुल 831 श्लोकों की रचना हुई है। शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों हेतु यह ग्रंथ अत्यंत उपयोगी है।
Customer Reviews