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Book Detail

Author: Acharya Mahashraman
Category: Jain Darshan Sahitya
Released: 2017
Language: Hindi
Pages: 105
80 (Inclusive all of Taxes)
Qty:


प्राणी के जीवन में पाप पुण्य का समायोजन होता है। जैन वांग्मय में 18 प्रवृतियां है जो पाप से बंधी हुई है। इन्हीं प्रवृतियों को 18 पाप कहा जाता है। अपने जीवन को पाप से पुण्य की ओर अग्रसर करने के लिए पढें पुस्तक 18 पाप।
Customer Reviews
  • Sandeep Patil
    Paap

    Very good book

    22 Nov 2017