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Book Detail

Author: Acharya Mahasharmana
Category: Pravachan Sahitya
Released: 2014
Language: Hindi
Pages: 137
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श्रीमद्भगवद्गीता और उत्तराध्ययन भारतीय साहित्य भण्डार के अमूल्य रत्न हैं। सनातन परम्परा में जहां गीता श्रद्धास्पद मानी जाती है वहीं उत्तराध्ययन एक प्रतिष्ठित जैनागम है। परम्परा भेद होने पर भी दोनों ग्रंथों में अनेकानेक समानताएं हैं। दोनों ग्रंथों में वर्णित साधना के गहरे सूत्र अध्यात्म की ऊंचाइयों पर ले जाने वाले हैं। आचार्यश्री महाश्रमण एक ऐसे सन्त हैं जिनके लिए पन्थ और ग्रन्थ का भेद बाधक नहीं बनता। आपके प्रवचन सर्वजनहिताय होते हैं। हर जाति वर्ग क्षेत्र और सम्प्रदाय की जनता आपके प्रवचनों से लाभान्वित होती रही। श्रीमद्भगवद्गीता और उत्तराध्ययन पर आधारित अपनी प्रलम्ब प्रवचन श्रृंखला में आपके दोनों ग्रंथों के गूढ़ रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। एक जैनाचार्य द्वारा उत्तराध्ययन की भांति गीता की भी अधिकार के साथ सटीक व्याख्या करना आश्चर्यजनक है। प्रस्तुत है उस महनीय प्रवचनमाला का तृतीय ग्रंथ विजयी बनो जिसमें आप जान सकते हैं कि जीवन में बदलाव के लिए केवल इच्छा का महत्व नहीं है अपितु निर्णय लेने से ही बदलाव संभव है और व्यक्ति विजयी बन सकता है।
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