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Book Detail

Mahapragya Vangmay Bhag 101 (Sukh Jyada Ya Dukh) (महाप्रज्ञ वांग्मय भाग 101 (सुख ज्यादा या दुःख))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 244
350 (Inclusive all of Taxes)
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सुख ज्यादा या दुःख सरस जीवन सुखद जीवन का प्रतिबिंब है। किसी छवि को पकड़ना बहुत मुश्किल है, पर छवि को पकड़ा भी जा सकता है। ध्वनि पर कब्जा कैसे किया जा सकता है, हम प्रतिध्वनि की दुनिया में रहते हैं, इसलिए हमें उनसे परिचित कराया जाता है। यह पुस्तक खुशियां, प्रसन्नता की अवधारणा को प्रस्तुत करती है। कोई व्यक्ति कैसे आंतरिक खुशी महसूस कर सकता है, जाने इस पुस्तक से।
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