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Book Detail

Bhitar Ka Rog Bhiter Ka Ilaz (भीतर का रोग: भीतर का इलाज)

Author: Acharya Mahapragya
Category: Preksha Chikitsa Sahitya
Released: 2014
Language: Hindi
Pages: 212
320 (Inclusive all of Taxes)
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मनुष्य को चिकित्सा की अवश्यकता पड़ने के दो प्रमुख कारण है आन्तरिक व बाह्य। आन्तरिक और बाह्य दुष्प्रभावों से बचने के लिए भी दो प्रकार चकित्सा की प्रचलित है-शरीरिक चिकित्सा और मनोचैतसिक चिकित्सा।
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