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Mahapragya Vaangmay-018 (Jain Darshan Aur Anekaant) (महाप्रज्ञ वांग्मय-018 (जैन दर्शन और अनेकान्त))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 258
350 (Inclusive all of Taxes)
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आचार्य महाप्रज्ञ एक महान दर्शनशास्त्री थे। यह पुस्तक अनेकान्तवाद की अवधारणा को जैन दर्शन के संदर्भ में प्रस्तुत करती है। उक्त पुस्तक जैन विद्वानों एवं दर्शनशास्त्रियों हेतु अति उपयोगी है।
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