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Book Detail

Mahapragya Vaangmay-057 (Apna Darpan) (महाप्रज्ञ वांग्मय-057 (अपना दर्पण))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 0
350 (Inclusive all of Taxes)
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प्रेक्षा एक दर्पण की भांति है। इसमें साधक स्वयं अपनी छवि देख सकता है। एक दर्पण जो छवि पर कब्जा नहीं करता है, केवल छवि को दर्शाता है, हम ऐसे दर्पण से परिचित नहीं है। हमें परिचित होना होगा तभी हम सुखद और शांत जीवन जी सकते हैं। अपनी छवि को जानने के लिए पढें-अपना दर्पण।
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