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Book Detail

Anekant - Sahastitav Ka Darshanik Drshtikon (अनेकान्त - सहअस्तित्व का दार्शनिक दृष्टिकोण)

Author:
Category: Darshan Sahitya
Released: 2012
Language: Hindi
Pages: 115
70 (Inclusive all of Taxes)
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मूर्त ओर अमूर्त के बीच में जो खाई होती है जिसे प्राचीनता से समझने का प्रयास किया जाता रहा है उन्हीं तथ्यों को इस पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। जैन दर्शन के माध्यम तथा अनेकान्त विचारधारा से इसे समझने का प्रयास उक्त पुस्तक में किया गया है।
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