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Book Detail

Mahapragya Vaangmay-051 (Mann Ka Kaayakalp) (महाप्रज्ञ वांग्मय-051 (मन का कायाकल्प))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 0
350 (Inclusive all of Taxes)
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औषधीय उपचार,रसायन और भूगह की शरण में रहकर आदमी अपनी जीर्ण-शीर्ण कोशिकाओं को नया बना लेता है। कोशिका में नया होने की शक्ति सहज है। प्रयोग द्वारा उसका नवीनीकरण और अधिक गतिशील हो जाता है। परन्तु वास्तविक कल्प है आत्मा के साथ तादात्म्य का अनुभव और आराधना।
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