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Book Detail

Mahapragya Vaangmay-023 (Darshan Vahi Jo Jiya Ja Sake) (महाप्रज्ञ वांग्मय-023 (दर्शन वही जो जीया जा सके))

Author: Acharya Mahapragya
Category: Mahapragya Vangmay
Released: 2019
Language: Hindi
Pages: 0
350 (Inclusive all of Taxes)
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प्रारंभ से ही सत् और असत् के बारे में गतिरोध रहा है। दार्शनिक युग में इस विषय पर विद्वानों द्वारा बहुत विचार मंथन किया गया। जैन दर्शन में भी इस विषय पर विभिन्न प्रकार से चर्चा की गई। प्रस्तुत पुस्तक में भी इस विषय पर चर्चा और विश्लेषण किया गया है।
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