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Book Detail

Author: Acharya Mahapragya
Category: Pravachan Sahitya
Released: 2009
Language: Hindi
Pages: 92
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धर्म से समाज को शासित किया जा सकता है या नहीं- इस प्रश्न का उत्तर हां या ना में नहीं दिया जा सकता। धर्म ऐच्छिक स्वीकृति है। उसका आधार है हृदय परिवर्तन। पूरे समाज का हृदय परिवर्तन एक साथ हो जाए- यह सोचना अति प्रसंग है। धर्म-शून्य कोरी दण्ड-शक्तिशाली शासन-प्रणाली समाज को शासित कर सके- यह सोचना भी भ्रान्ति से शून्य नहीं है। समाज अपनी अवधारणा से शासित होता है। धर्म ने कुछ महत्त्वपूर्ण अवधारणाएं दी हैं। वे समाज के शासन में आधारभूत बनती हैं। इस पुस्तक में उन अवधारणाओं और विशेषतः भगवान् महावीर द्वारा प्रदत्त अवधारणाओं की संकेत-लिपि उपलब्ध है।
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